निज़ाम की खिसकती दीवारें और अतिक्रमण टूटने से निकलती चीखों की चर्चा
इस अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से केवल चेयरमैन कालवा को ही झटका नहीं लगा है बल्कि एक आरपीएस अधिकारी और एक आरएएस अधिकारी को भी जोर का झटका धीरे से लगा है।
इस अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से केवल चेयरमैन कालवा को ही झटका नहीं लगा है बल्कि एक आरपीएस अधिकारी और एक आरएएस अधिकारी को भी जोर का झटका धीरे से लगा है।
यह कार्रवाई बहुत पहले होनी चाहिए थी,परन्तु मील परिवार ने अब जाकर संज्ञान लिया है। जबकि राजनीतिक तौर पर इस देरी से उनकी छवि का काफ़ी नुकसान हो चुका है। खैर जब जागो तभी सवेरा।
आखिरी भोजन के दौरान ही क्राइस्ट बताते हैं कि अब उनका अंत करीब है। शिष्यों में शॉक फैल जाता है। पर ये शॉक और बढ़ जाता है जब शिष्यो को बताया जाता है, कि उनमें से कोई एक है, जो धोखा देगा। अब हर एक शिष्य के चेहरे पर अलग भाव है। भय, धोखा, शॉक, शोक, गुस्सा, उदासी, चिंता.. और एक एक शिष्य के चेहरे पर एक एक भाव है।दूसरी और क्राइस्ट के चेहरे पर न दुख है, न भय।
वैसे चैयरमेन कालवा को ये भी जानना चाहिए कि हाथियों की लड़ाई में हमेशा घास ही कुचली जाती है। खैर चैयरमेन कालवा चाहे तो मुल्ला नसीरुदीन की इस कहानी से सबक लें सकते।