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ओवरब्रिज का विस्तार- जोर का झटका धीरे से !

डेढ़ सौ करोड़ के बजट का ढोल पीटने वाली सूरतगढ़ नगरपालिका के आर्थिक हालात इन दिनों बेहद खराब है। क्योंकि नगरपालिका की आय का एक बड़ा स्रोत है- भूखंडों की नीलामी से होने वाली आय, लेकिन प्रॉपर्टी बाजार में मंदी के चलते पालिका द्वारा की गई बोलियां लगातार फेल होती जा रही हैं। हालत ये है कि पालिका के लिए अपने रोजमर्रा के खर्चे निकालना भी मुश्किल हो रहा है।

काचर रो बीज !

विरोध की राजनीति में कांग्रेस इस मामले में फ्रंट फुट पर होनी चाहिए थी । लेकिन फिर क्या वजह रही कि धरना स्थल पर 'पॉलीटिकल माइलेज' लेने की बजाय कांग्रेसी नेता हनुमान मील अपना आपा खो बैठे ? आखिर ऐसा कौन था जिसने कांग्रेस नेता को इस तरह का वक्तव्य देने के लिए उकसाया ? इस वाद विवाद से दोनों नेताओं की छवि को नुकसान पहुंचा है तो फिर कौन है जिसने इस पूरे घटनाक्रम से फायदा उठाया ?

ओवरब्रिज को लेकर हनुमान मील और विधायक कासनिया आमने-सामने

हनुमान मील ने विधायक रामप्रताप कासनिया पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें आश्चर्य हो रहा है कि एक तरफ तो उनकी पार्टी से जुड़े लोगों ने ब्रिज का स्थान परिवर्तन कर इस समस्या को जन्म दिया तो दूसरी और खुद ही विधायक इस मामले में धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। हनुमान मील के आरोपों का जवाब देते हुए विधायक कासनिया ने शहर में बने ओवरब्रिज को लेकर मील परिवार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पिछले कार्यकाल में मील परिवार ने शहर को लाइनपार क्षेत्र से जोड़ने वाले ओवर ब्रिज का नक्शा बदलवाकर बेड़ा गर्क कर दिया।

भ्रष्टाचार के महाकुंभ में पुण्य पट्टा हासिल करने वालों की सूची जारी

लॉकडाउन में नगरपालिका में लगा था भ्रष्टाचार का महाकुंभ चेयरमैन कालवा के आशीर्वाद से ईओ...

नगरपालिका की बैठक में विधायक कासनिया से अशोभनीय व्यवहार

मास्टर जी को नजदीक से जाननेे वाले लोगोंं का मानना है कि चेयरमैन बनने के बाद से मास्टर जी पर्सनैलिटी डिसऑर्डर का शिकार है, जिसकी वजह है मास्टर जी का अहंकार ! यही वजह है कि मास्टरजी अब अपने प्रतिद्वंद्वियों को नीचा दिखाने का कोई भी अवसर नहीं चूकते हैं। इसका उदाहरण नगरपालिका बोर्ड की इसी बैठक में भी देखा गया। जब उन्होंने कांग्रेस के ब्लॉक अध्यक्ष को ही असामाजिक तत्व बता डाला।

ओम कालवा के राज में 1 करोड़ रुपये की सरकारी भूमि पर भूमाफ़ियों का कब्ज़ा

जिस रफ्तार से शहर में सरकारी भूमि पर कब्जा करने का अभियान जारी है उससे तो नही लगता है कि वर्तमान बोर्ड का कार्यकाल पूरा होने तक शहर में एक इंच भी सरकारी भूमि बच पाएगी। ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि शहर के लगभग सभी वार्डों में आपके चुने हुए पार्षदों में कुछ एक को छोड़कर अधिकांश पार्षद प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से या तो इन भूमाफियों का सहयोग कर रहे हैं

बेशकीमती व्यवसायिक भूमि को आवासीय के रूप में बेचने की तैयारी !

विपक्षी नेताओं व चुने हुए पार्षदों ने साधी चुप्पी सूरतगढ़। सूरतगढ़ नगरपालिका द्वारा 21 सितम्बर...

गरीबों के राशन पर व्यवस्था का डाका !

कोरोना काल मे जब लोग अपने पैसों से गरीबों की मदद के लिए आगे आ रहे थे उसी दौर में नगरपालिका के भृष्ट सिस्टम ने गरीबों को बांटी जाने वाली राशन किट में ही खेल कर दिया गया तो आप खुद ही अंदाज़ा लगा सकते हैं कि नगरपालिका के अफसर और बाबू किस स्तर पर भ्रष्टाचार की सीमाएं लाँघ चुके हैं ।

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